देश में पहली बार रेस्क्यू की गई मादा बायसन, झुंड से अलग होकर नर्मदा नदी पार कर रातापानी सेंचुरी पहुंची

देश में पहली बार किसी बायसन को रेस्क्यू किया गया है। इसको रेस्क्यू करने के लिए दो नेशनल पार्कों की टीम को तीन घंटे मशक्कत करना पड़ी। यह मादा बायसन सतपुड़ा नेशनल पार्क में बायसन के झुंड से अलग होकर नर्मदा नदी पार करके सुहागपुर से होते हुए रातापानी सेंचुरी के बिनेका रेंज के नागिन घाट पीपलवाल गांव के नजदीक पहुंच गई थी । इस बायसन को रेस्क्यू करने के लिए कान्हा नेशनल पार्क की रेस्क्यू टीम को भी बुलाया गया था।

कान्हा नेशनल पार्क टीम ट्रांसलोकशन वाहन लेकर पहुंची थी। जिसमें पांच सौ किलो के बायसन को बेहोश करके चढ़ा कर वन विहार पहुंचाया गया। इसे गुरुवार को वन विहार में बायसन बाड़े में छोड़ा गया। वन विहार में अब बायसन की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। यहां पहले से दो नर मौजूद है।वन विहार में लाई गई मादा बायसन को यहां पहले से रह रहे दोनों नर बायसन ने पूरी तरह से स्वीकार कर लिया। वन विहार के डिप्टी डायरेक्टर एके जैन ने बताया कि जैसे ही मादा बायसन को बाड़े में छोड़ा गया। वह धीरे धीरे चलते हुए दोनों नर बायसन के पास पहुंच गई। नर बायसन के द्वारा स्वीकार करने की प्रतिक्रिया के बाद वन विहार प्रबंधन ने चैन की सांस ली।

मादा बायसन सतपुड़ा नेशनल पार्क के झुंड से अलग होकर रातापानी सेंचुरी पहुंची।

इस मादा बायसन का वजन तकरीबन 5 सौ किलो है और इसकी उम्र 10 से 12 वर्ष है। वन विहार की रेस्क्यू टीम का नेतृत्व डॉ. अतुल गुप्ता ने किया। वहीं कान्हा नेशनल पार्क की रेस्क्यू टीम का नेतृत्व डॉ. संदीप अग्रवाल ने किया।

जंगल में खड़ी मादा वायसन।

पहली बार किया बायसन को रेस्क्यूदेश में किसी भी शाकाहारी वन्य प्राणी को रेस्क्यू कैप्चर बोमा के माध्यम से किया जाता है। यदि इन्हें बेहोश किया जाता है इनकी सांस नलिका में जुगाली करने वाला भोजन फंस जाता है और इनकी मौत हो जाती है। अभी तक 150 सौ से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन कर चुके वन विहार के डॉ. गुप्ता ने बताया कि यह पहला मौका है जब उन्होंने किसी बायसन को बेहोश करके रेस्क्यू किया। इसको रेस्क्यू करना काफी कठिन था। उनका कहना है कि बेहोश करने वाली दवाई का डोज थोड़ा भी कम या ज्यादा हो जाता मुश्किल हो जाती। इसके वजन का अनुमान उन्होंने 5 सौ किलो का लगाकर बेहोशी की दवा को डोज तैयार किया था।

अब इसे वनविहार में छोड़ दिया गया है।

नर बायसन होता है हमेशा झुंड से अलगकान्हा नेशनल पार्क के डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि प्रकृति के हिसाब से हमेशा झुंड से नर बायसन को निकाला जाता है। मादा बायसन झुंड से अलग क्यों और कैसे हुई यह जांच का विषय है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today मादा बायसन सतपुड़ा नेशनल पार्क में झुंड से अलग होकर नर्मदा नदी पार कर सुहागपुर होते हुए रातापानी सेंचुरी पहुंची।

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