तीन साल पहले दमोह से लापता हुआ बारेलाल पाकिस्तान में पकड़ा गया

दमोह .नोहटा थाना के शीशपुर गांव से तीन साल पहले लापता हुआ बारेलाल आदिवासी मंगलवार को पाकिस्तान में पकड़े जाने की सूचना पर पुलिस पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। पुलिस ने स्क्रीन शॉट दिखाया तो संबंधित व्यक्ति बारेलाल ही होने की पुष्टि परिजनों ने की। हालांकि अभी तक पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है कि संबंधित व्यक्ति दमोह से लापता हुआ बारेलाल ही है। पूरे मामले की दमोह एसपी कार्यालय से आईजी सागर और पुलिस मुख्यालय भोपाल सूचना भेजी गई है। इधर देर रात एएसपी विवेक सिंह स्वयं गांव पहुंचे और उन्होंने परिजनों से पूछताछ की।

दमोह एसपी विवेक सिंह ने बताया कि मामले से जुड़ी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है। बारेलाल आदिवासी नामक जिस व्यक्ति की पाकिस्तान में पकड़े जाने की बात कही जा रही है, उसका चित्र देखकर परिवार के लोगों ने पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बारेलाल आदिवासी 31 गांव से लापता हो गया था। उसके पिता शुब्बी आदिवासी ने नोहटा थाने में 4 मार्च 2017 को गुमशुदगी दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि नोहटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी को परिजनों के पास भेजा गया था। जहां पर उन्होंने पाकिस्तान में पकड़े गए युवक से जुड़ी खबर के स्क्रीन शॉट दिखाए। परिजन संबंधित युवक बारेलाल होने का दावा कर रहे हैं। हालांकि एसपी विवेक सिंह ने संबंधित युवक बारेलाल ही होने की पुष्टि नहीं की। उन्होंने बताया कि बारेलाल के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज है। संबंधित व्यक्ति वह ही है कि नहीं। इसकी हकीकत पड़ताल होने पर पता चलेगी। हालांकि अभी शासन से रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति स्पष्ट हाेगी।

बारेलाल मानसिक रूप से कमजोर है, इसका उल्लेख गुमइंसान की रिपोर्ट में किया गया है। भाई पदम आदिवासी के मुताबिक दो बार पहले भी बारेलाल भाग चुका था, लेकिन रिश्तेदारों से सूचना मिलने बारेलाल मिल गया और उसे पकड़कर गांव ले आए थे, लेकिन इस बार वह लापता हुआ तो उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। परिजनों से और आसपास के गांव के लोगों से भी पूछा। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।

ग्वालियर : बांग्लादेश की जेलों में बंद हैं मप्र के दो नागरिक, पते-ठिकाने गलत होने के कारण नहीं हो पा रहा उनका भारत प्रत्यर्पण

बांग्लादेश की दो अलग-अलग जेलों में मप्र के दो नागरिक बंद हैं। वे अपनी सजा पूरी कर चुके हैं। पहला, 50 वर्षीय हरि बच्चन पिता बान बच्चन बांग्लादेश के जिला जमालपुर की जेल में 31 मई 2013 से सजा पूरी होने के बावजूद बंद हैं। दूसरा, परमेश्वर मार्ती मरांडी पुत्र मोनो मरांडी राजधानी ढाका स्थित जेस्सोर जेल में 10 फरवरी 2017 को सजा पूरी करने के बाद से बंद हैं। बांग्लादेश के उप उच्चायुक्त कार्यालय ने भारत सरकार से दोनों नागरिकों की पहचान प्रमाणितकरने को कहा। जिससे दोनों कैदियों का प्रत्यर्पण भारत सरकार को किया जा सके।

जिसके बाद भारत सरकार की ओर से मप्र के मुख्य सचिव और फिर प्रमुख सचिव गृह से संपर्क किया गया। प्रमुख सचिव मिश्रा ने 52 जिलों के कलेक्टरों से दोनों नागरिकों की पहचान प्रमाणित करने पत्र लिखा, लेकिन मप्र का नागरिक होने की प्रमाणिकता नहीं हो सकी।

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