मध्यपूर्व में लड़ाई के लिए सेना नहीं भेजेंगे: ट्रम्प, ईरान ने कहा- हम भी युद्ध नहीं चाहते

वॉशिंगटन. अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव चरम पर है। ट्रम्प प्रशासन ने ईरान की परमाणु परीक्षण की धमकियों के बाद मध्यपूर्व में अपना नौसैना आक्रमण दल तैनात कर दिया है। हाल ही में खबर आई थी कि ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका मध्यपूर्व में 1 लाख 20 हजार सैनिकों का बेड़ा भेज सकता है। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है। वहीं ईरान ने भी अमेरिका के खिलाफ आक्रामक रवैया अपनाने की बात नकारी है।

अमेरिका अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने सरकार में अफसरों के हवाले से दावा किया था कि ट्रम्प मध्यपूर्व में सेना को और ज्यादा बल देना चाहते हैं। लेकिन ट्रम्प ने इसे फेक न्यूज बताया है। उन्होंने कहा कि हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है और अगर कभी इसकी संभावना बनी तो हम इससे ज्यादा ताकतवर सेना भेजेंगे।

दूसरी तरफ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खमनेई ने मंगलवार को कहा कि अमेरिका के साथ कोई युद्ध नहीं होगा। रिपोर्ट्स में कहा गया था कि ईरान अमेरिका का सामना करने के लिए आक्रामक रवैया अपना सकता है। लेकिन खमनेई ने कहा कि न तो ईरान और न ही अमेरिका ऐसा कोई युद्ध चाहता है। हांलाकि, उन्होंने ट्रम्प प्रशासन के साथ समझौता न करने की बात कही। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए जहर हो सकता है, क्योंकि अमेरिका उनके सारे मिसाइल और तकनीक लेना चाहता है।

पाकिस्तान ने कहा- हम स्थिति पर नजर बनाए हुए हैंइसी बीच पाकिस्तान ने कहा कि वह अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। पाक के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि हम जल्द ही ऐसी योजना बनाएंगे जिससे पाक के हितों को नुकसान न पहुंचे। दरअसल, पाक ईरान के साथ गैस पाइपलाइन के निर्माण में जुटा है। लेकिन अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से उसका प्रोजेक्ट बीच में ही अटक गया है। इसी को लेकर पाकिस्तान ईरान के साथ बातचीत की कोशिशों में जुटा है।

Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खमनेई (बाएं) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (दाएं)