गांधी परिवार से नफरत नहीं, हमारी लड़ाई परिवारवाद से; निजी हमले हमारे नहीं, उनके संस्कार हैं: अमित शाह

तीसरे दौर की वोटिंग से ठीक पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अहमदाबाद में दिव्य भास्कर स्टेट एडिटर देवेंद्र भटनागर के साथ खास बातचीत की। राष्ट्रवाद, विकास, मोदी फैक्टर, पश्चिम बंगाल, यूपी, अनुच्छेद 370 से लेकर प्रचार में भाषा के गिरते स्तर तक पर शाह ने जवाब दिए। पढ़िये पूरी बातचीत...

2014 और 2019 के चुनाव में क्या अंतर है?2014 के चुनाव का बैकग्राउंड निराशा से निकला था। कांग्रेस के 10 साल के शासन से उपजी निराशा के खिलाफ चुनाव था। जबकि, 2019 का चुनाव आशाओं का चुनाव है। लोगों को मोदी में उम्मीदें दिख रही हैं। देश में कभी न हुए ऐसे काम इन पांच सालों में हुए हैं। देश की सुरक्षा को लेकर किसी के मन में कोई संशय नहीं है। अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। देश फास्टेट ग्रोइंग इकोनॉमी बन गया है। दुनिया में देश का सम्मान बढ़ा है। 50 करोड़ गरीबों के जीवन स्तर को बदलने में जमीनी सफलता मिली है। सामाजिक जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जहां सरकार नहीं पहुंची। इसलिए इस बार 2014 से भी प्रचंड लहर देख रहा हूं।

गांधी परिवार बनाम मोदी-शाह के बीच ऐसी नफरत, कड़वाहट क्यों है?हमें कांग्रेस या गांधी परिवार से नफरत नहीं है। हमारा मुद्दा परिवारवाद है। देश से परिवारवाद जाना चाहिए। राजनीति में लोकतंत्र होना चाहिए। राजा का बेटा ही राजा बने तो फिर लोकतंत्र की जरूरत ही क्या थी। पहले ऐसी व्यवस्था थी, लेकिन कांग्रेस ने इस व्यवस्था को लोकतांत्रिक ढांचे में फिट कर दिया। रही बात निजी हमले की तो ठीक है। वो अपने संस्कार के अनुसार बोलेंगे, हम अपने संस्कार के अनुसार व्यवहार करेंगे।

विपक्ष कहता है ‘मोदी हटाओ’। भाजपा कहती है ‘मोदी है तो मुमकिन है’। व्यक्ति केंद्रित राजनीति क्यों? विपक्ष के नारे को आप व्यक्ति केंद्रित कह सकते हैं, जबकि हमारा नारा है ‘मोदी है तो मुमकिन है।’ इसके बाद ‘फिर एक बार मोदी सरकार’। इसमें मोदी शब्द के पीछे सरकार के पांच साल के काम हैं। इसमें व्यक्ति नहीं, परफॉर्मेंस की बात है। जो प्रधानमंत्री होता है, वही सिंबल बनता है। स्लोगन में पैरोडी करने वाले अपने-अपने हिसाब से काम करते रहते हैं।

मोदीजी को आप जितना जानते और समझते हैं, उतना दूसरा कोई नहीं...(बीच में रोकते हुए) ऐसा नहीं है। कई कार्यकर्ता लंबे समय से उनके साथ रहे हैं।

आपने मोदी की खूबियां तो बता दी, कुछ कमजोरियां भी आपको लगती होंगी?मुझे लगता है कि मोदीजी मीडियावालों को समझने में विफल रहे हैं और मीडिया मोदीजी को समझने में विफल रहा है।

2014 के राहुल और 2019 के राहुल में क्या अंतर देखते हैं?बस, उनकी उम्र बढ़ी है।

उनकी बातों में, व्यवहार में अंतर?ये फैसला जनता को करने दो।

अब तो प्रियंका भी राजनीति में आ गई हैं?प्रियंकाजी को मैं 12-13 साल से देख रहा हूं। मीडिया ने उनकी चौथी बार एंट्री कराई है। हर चुनाव में वो प्रचार करती थीं। पिछले साल बनारस, इलाहाबाद, लखनऊ में प्रचार किया था। वो आई कहां हैं, वो तो पहले से ही थीं।

यानी भाजपा के लिए प्रियंका फैक्टर नहीं?हम हमारी स्ट्रेंथ पर चुनाव लड़ते हैं। वो विपक्ष की नेता हैं। हमको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

प्रियंका ने गंगा आचमन किया। राहुल मंदिर जा रहे हैं। क्या विपक्ष का नजरिया बदला है?मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि मंदिर जाने को मुद्दा बनाने की जरूरत क्या है? हर व्यक्ति को मंदिर जाना चाहिए। पहले नहीं जाते थे तो ये मीडिया को उनसे पूछना चाहिए। प्रियंका ने गंगा आचमन किया, क्योंकि गंगा अब साफ है। पूरा देश ऐसा मानता है।

क्या ये सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है?हां, बिलकुल। अभी और भी बड़े काम होंगे। 2022 तक सब काम पूरे हो जाएंगे।

आपने कहा कि राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस का पतन हो रहा है। लेकिन, मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस जीती?तीनों राज्यों में कांग्रेस जरूर जीती, लेकिन हम हारे नहीं हैं। पिछले तीन-चार महीनों से वहां जैसी सरकारें चल रही हैं, नोट निकल रहे हैं। जनता को भी अहसास हो गया है कि गलत हाथों में सत्ता दे दी।

साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने का कारण? क्या भगवा आतंक को मुद्दा बनाना था?बिलकुल नहीं। भारतीय संस्कृति को बदनाम किया था। भगवा आतंकवाद जैसे नाम दिए गए। जो हिंदू धर्म काटने वाली चींटी को भी आटा डाले वो क्या बम धमाके करेगा? हिंदू संस्कृति को आतंकवाद के साथ जोड़ने के खिलाफ ये हमारा सत्याग्रह है।

यानी भोपाल का चुनाव सत्याग्रह है?ये उनकी साजिश थी। उसे उजागर करने के लिए साध्वी प्रज्ञा को उम्मीदवार बनाया। ताकि षड्यंत्र के मूल सूत्रधार को बेनकाब किया जा सके।

2014 से भी ज्यादा सीटें जीतने के आपके दावे का आधार क्या है?ऐसी 65 सीटें जीतेंगे, जहां 2014 में हारे थे बंगाल, ओडिशा, पूर्वोत्तर, केरल में यूपी की तरह चौंकाएंगे

2014 में भाजपा ने कई राज्यों में क्लीन स्वीप किया था। इस बार वैसी लहर नहीं दिख रही है?पिछली बार जिन 15 राज्यों में हमने क्लीयर जीत हासिल की थी, वहां आज भी हमारी स्थिति खराब नहीं है। एक-दो सीटें ऊपर-नीचे हो सकती हैं। दूसरी बात- बंगाल, ओडिशा, पूर्वोत्तर, केरल के दरवाजे हमारे लिए खुले हैं। हम इस बार यहां ज्यादा सीटें निकालेंगे। ऐसी 65 सीटें हम जीतने वाले हैं, जहां 2014 में हम हारे थे। बंगाल चौंकाएगा। हम वहां 23 सीटें जीतेंगे। केरल में 5 सीटें जीतेंगे।

मोदीजी 13 साल सीएम रहे। 5 साल से पीएम हैं। लगातार 18 साल से लोकप्रियता की वजह?मोदीजी ने 20 साल में एक दिन का भी अवकाश नहीं लिया है। 18 घंटे लगातार काम करते हैं। कठोर निर्णय करने की हिम्मत है। जनता इसी तरह के नेतृत्व को देखती है, स्वीकारती है।

कांग्रेस न्याय योजना लाई। भाजपा इसे ड्रामा कह रही है। गरीबों का उपयोग कब तक वोट के लिए होगा?

गरीबी इसलिए दूर नहीं हुई क्योंकि 55 साल तक कांग्रेस का राज रहा। गरीबी का एकमात्र कारण है गांधी परिवार और परिवारवाद।

भाजपा के संकल्प पत्र में 95 बार राष्ट्रवाद की बातें। कांग्रेस ने राष्ट्रवाद की धारा हटाने की बात कही, इसलिए इसे प्रमुखता दी गई?हमारे हर घोषणा पत्र में राष्ट्रवाद रहा है। इसी प्रेरणा के आधार पर हम राजनीति में सक्रिय हैं।

370 हटाने, राम मंदिर हर चुनाव में रहता है। सामान्य लोगों को लगता है के ये सिर्फ चुनावी मुद्दे हैं।राम मंदिर का केस सुप्रीम कोर्ट में हैं। 370 हटाने के लिए राज्यसभा में बहुमत चाहिए। लेकिन हमें अपना कमिटमेंट तो जाहिर करना पड़ेगा ना कि मंदिर वहीं बनेगा। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि वो बताएं-अयोध्या में मंदिर बनना चाहिए या नहीं। कांग्रेस से पूछिए कि वो अपने इरादे बताए। सवाल उनसे पूछना चाहिए।

मोदी सरकार जनधन, आयुष्मान जैसी योजनाएं लाई। फिर भी राष्ट्रवाद पर चुनाव लड़ा जा रहा है?हम विकास योजनाओं की बात करते हैं। बस, मीडिया फोकस नहीं करता। हम जब कहते हैं कि 22 करोड़ लोगों के जीवन में परिवर्तन आया तो कोई छापता नहीं। धारा 370 को हटाने की बात कहता हूं तो हेडलाइन बन जाती है। मेरे 45 मिनट के भाषण में से 2 मिनट का हिस्सा ही छपता है। 43 मिनट का भाषण तो इग्नोर हो जाता है।

मीडिया को लेकर इतनी तल्खी क्यों?बिलकुल नहीं। मैं नाराज नहीं हूं। लेकिन आपके पास (मीडिया) सही और पूरी बात समझने का धैर्य नहीं होना चाहिए क्या?

चुनाव में भाषा का स्तर गिर गया है। नई पीढ़ी राजनीति में आने से डरने लगी है?बिलकुल सहमत हूं। संवेदना में आकर, भीड़ देखकर, आवेश में कोई कुछ कह जाता है। चुनाव आयोग का काम है इन पर नजर रखना और वो अच्छी तरह ये कर रहा है।

सोनियाजी कहती हैं 2004 में हमने अटल को हराया था, मोदी भी अजेय नहीं हैं?मुझे इस पर कुछ नहीं कहना। लेकिन लोकतंत्र में कोई अजेय नहीं होता।

शरद पवार कहते हैं कि मोदी सत्ता में आए तो फिर कभी चुनाव नहीं होंगे? पृथ्वीराज चव्हाण कहते हैं कांग्रेस फिर खत्म हो जाएगी?कांग्रेस के विषय में मैं कुछ नहीं कहूंगा। राहुलजी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस जिस तरह चल रही है, उससे तो उसका भविष्य कांग्रेस वाले ही तय करेंगे। हां, पवार साहब को ऐसा कहना शोभा नहीं देता। यही कांग्रेस है जिसने देश में इमरजेंसी लगाई थी। लाखों कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया था। इतिहास सामने है। इस समय चुनाव हो रहे हैं। आगे भी होते रहेंगे।

सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस। आरबीआई, सीबीआई में विवाद। सरकार की छवि खराब नहीं हुई?(सवाल करते हुए...) क्या सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी?

लेकिन माहौल तो ऐसा ही बना ना?माहौल मीडिया ने बनाया था। चार जजों में से एक ने भी सरकार के खिलाफ स्टेटमेंट नहीं दिया। प्रेस कॉन्फ्रेंस चीफ जस्टिस के खिलाफ थी।

कम आंकड़ों के बावजूद सरकार बनानी हो तो एक ही नाम आता है-अमित शाह। क्या रणनीति बनाते हो?ऐसा किस राज्य में हुआ? (हमने कहा गोवा में) एक बात मुझे बताओ। किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला तो क्या दो पार्टी मिलकर सरकार नहीं बना सकते? गलत क्या था?

मोदीजी गुजरात से नहीं लड़ रहे, इसलिए बड़े चेहरे के रूप में आपको गांधीनगर से उतारा गया?कयास की जरूरत नहीं है। मैं गुजरात में पांच बार विधायक रहा हूं। पार्टी ने तय किया कि राष्ट्रीय राजनीति में आना चाहिए तो मैं आ गया।

कश्मीर के नेता धमकी दे रहे हैं कि 370 हटाई तो देश में आग लग जाएगी?तो? ऐसी धमकियों से देश चलता है? ऐसी धमकियों से डरने के दिन गए। जो फैसला देश के हित में होगा, वो हम करेंगे। मैं मानता हूं कि 370 को हटाना चाहिए। ये कश्मीर और देश के हित में होगा।

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