पिता के एसईसीएल से रिटायर होने के 25 साल बाद तक मकान का कब्जा, किराया वसूली का आदेश बरकरार

एसईसीएल से रिटायर होने के 25 साल बाद तक कंपनी की तरफ से मिले आवास का कब्जा नहीं छोड़ा गया। पिता की 2008 में मौत के बाद बेटा वहां रह रहा था। वसूली का आदेश जारी होने के बाद 2015 में अंतिम रूप से कब्जा छोड़ा गया। बकाया किराया वसूली के आदेश के खिलाफ याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। एसईसीएल के तहत कोरबा में कार्यरत एनके बोस को कोरबा के रशियन कॉलोनी में कंपनी की तरफ से क्वार्टर नंबर- 1सी/8 आवंटित किया गया था। वे 1 जुलाई 1990 को रिटायर हो गए, लेकिन मकान का कब्जा नहीं छोड़ा। वर्ष 2008 में उनकी मौत हो गई, इसके बाद बेटा जयंत बोस वहां रहने लगा। कंपनी के संपदा अधिकारी के बार-बार नोटिस जारी करने के बाद अंतत: 31 मार्च 2015 को कब्जा छोड़ा गया। रिटायर होने के 25 साल बाद तक मकान पर कब्जा रखने की वजह से एसईसीएल ने बेटे को 5 लाख 28 हजार 49 रुपए पेनाल्टी जमा करने के लिए कहा। बाद में इसे तीन लाख रुपए करते हुए राशि जमा करने के लिए नोटिस जारी किया गया। जयंत ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जस्टिस गौतम भादुरी की बेंच ने तथ्यों के आधार पर याचिका खारिज कर दी है।

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