छत्तीसगढ़: यहां मोदी फैक्टर को कांग्रेस की बड़ी जीत से चुनौती

छ त्तीसगढ़ में मोदी फैक्टर तो चल ही रहा है लेकिन मुकाबले में विधानसभा चुनाव परिणामों से बना माहौल भी है। मोदी फैक्टर को यहां विधानसभा में कांग्रेस की बड़ी जीत कम करती नजर आ रही है। इसी के चलते इस बार परिणाम अलग हटकर आएंगे, यह तय लग रहा है। तीसरे चरण में 23 अप्रैल को सात सीटों पर मतदान होना है। दुर्ग ही अकेली सीट है जहां पिछली बार कांग्रेस जीती थी। बाकी छह सीटों रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर, सरगुजा और रायगढ़ में भाजपा के सांसद थे। भाजपा ने इस बार सारे सांसदों को घर बैठाकर नए चेहरों पर दांव खेला है। सीएम भूपेश बघेल ने राज्य की 90 में से 68 सीटें जीतकर जिस ढंग से भाजपा को पटखनी दी है, उससे लोकसभा चुनाव अछूता नहीं है। यहां कांग्रेस अब दावा कर रही है कि पिछले चुनाव के परिणाम यानी 10-1 को इस बार अपने पक्ष में पलट लेेगी। भाजपा की कोशिश है कि चुनाव मोदी के चेहरे और राष्ट्रवाद के माहौल में सिमट जाए। पर सबसे बड़ी चुनौती है कार्यकर्ताओं का उदासीन होना। यह पहला चुनाव है, जिसमें चुनावी सरगर्मी सबसे कम है। पहली बार जातिवाद से बाहर आकर चुनाव हो रहा है रायपुर में भाजपा के पूर्व महापौर सुनील सोनी और कांग्रेस के वर्तमान महापौर प्रमोद दुबे के बीच सीधी टक्कर है। यहां पहली बार जातिवाद से बाहर लोकसभा चुनाव हो रहा है। स्थानीय मुद्दा नहीं होने से चुनाव मोदी फैक्टर, रफाल और चौकीदार जैसे शब्दों पर सिमटा है। यहां दोनों दल सेंधमारी में लगे हुए हैं। यहां फैसला अंतिम क्षणों में चुनाव प्रबंधन की बदौलत ही आ आएगा। गणित की बात करें तो यहां 9 विधानसभाओं में से अभी 6 पर कांग्रेस, 2 पर भाजपा और 1 जोगी कांग्रेस के पास है। सीएम की प्रतिष्ठा दांव पर दुर्ग में प्रत्याशी से ज्यादा सीएम भूपेश बघेल की चर्चा है। उनका गृह क्षेत्र होने से सीट से उनकी प्रतिष्ठा सीधे जुड़ी है। कांग्रेस की प्रतिमा चंद्राकर को उनका स्पष्ट समर्थन है। भाजपा ने यहां अच्छा दांव खेला है। उन्होंने मुख्यमंत्री भूपेश के ही रिश्तेदार विजय बघेल को मैदान में उतार दिया है। ऐसे में कुर्मी समाज के वोटों का बंटवारा हो चुका है। बता दें- विजय बघेल इससे पहले भूपेश बघेल को चुनाव में हरा चुके हैं। बिलासपुर लोकसभा ही ऐसी सीट है जहां कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में एकतरफा बढ़त नहीं मिल पाई। यहां पर सीएम के करीबी अटल श्रीवास्तव को कांग्रेस ने टिकट दिया है। पूरा जोर साहू वोटों के ध्रुवीकरण पर है। विधानसभा के मामले में कांग्रेस यहां पिछड़ी हुई दिखती है। उसके पास सिर्फ दो सीटें हैं। भाजपा के पास 4 और जोगी कांग्रेस के पास 2 सीटें हैं। एससी वर्ग के लिए आरक्षित जांजगीर ही ऐसी सीट है जहां त्रिकोणीय मुकाबला है। यहां भाजपा, कांग्रेस और बसपा...तीनों मुकाबले में है। जांजगीर इलाका ही ऐसा है जहां पर बसपा के फिक्स वोटर हैं। इस वजह से यहां अनुमान कठिन हो गया है। वैसे मुद्दा यहां भी राष्ट्रीय ही हैं लेकिन जातिवाद के वोटों के बंटवारे में जिसने बाजी मार ली वह आगे निकल जाएगा। यहां 4 विधानसभाओं में कांग्रेस, 2 में भाजपा और 2 में बसपा के विधायक हैं। भूपेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री टीएस सिंहदेव के प्रभाव वाली सरगुजा में कांग्रेस को एकतरफा बढ़त है। यहां की आठों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। भाजपा की तेजतर्रार पूर्व विधायक रेणुका सिंह महिलाओं के वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही हैं। कोरबा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत के प्रभाव वाली सीट पर कांग्रेस ने प|ी ज्योत्सना महंत को उतारकर बढ़त बनाने की कोशिश की है। महंत खुद मोर्चे पर डटे हैं। यह सीट भाजपा की अंदरुनी खींचतान की वजह से चर्चा में है। रायगढ़ में केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय का टिकट काटकर भाजपा ने यहां गोमती साय को टिकट दिया है। गोमती साय चर्चित नाम है। इसके बावजूद भाजपा को चुनौती मिल रही है। कांग्रेस की विधानसभा में जीत का असर यहां खासा नजर आ रहा है। इससे मोदी फैक्टर यहां पर उतना प्रभावी नहीं है, जितना दूसरी सीटों पर है। शिव दुबे, छत्तीसगढ़ वोट की स्थिति विधानसभा से देखिए लोकसभा क्षेत्र 2018 विधानसभा चुनाव कांग्रेस भाजपा अन्य रायपुर  9 6 2 1 दुर्ग  9 8 1 0 बिलासपुर  8 2 4 2 जांजगीर  8 4 2 2 सरगुजा  8 8 0 0 कोरबा  8 6 1 1 रायगढ़  8 8 0 0 कुल विधानसभा सीट

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