80 लाख के हाईवे मरम्मत में ठेकेदार की मनमानी मरम्मत के चार दिन के भीतर ही उखड़ने लगी सड़क

भास्कर संवाददाता|मनेंद्रगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 43 में इन दिनों सड़क मरम्मत का कार्य नियमों को ताक पर रखकर कराया जा रहा है, इसके चलते निर्माण के चार दिनों के भीतर ही सड़क उखड़नी शुरू हो गई है। वहीं आनन-फानन में उखड़ी हुई सड़क को दोबारा बनाने का कार्य ठेकेदार द्वारा शुरू किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 43 में सड़क चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है, लेकिन वन परिक्षेत्र वाले हिस्से में अब तक अनुमति नहीं मिल पाने से सड़क चौड़ीकरण का कार्य अब तक अधर में है। वहीं दूसरी ओर एनएच-43 सड़क के वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्से में सड़क क्षतिग्रस्त हो गई है। मार्ग में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, जिससे वाहन चालकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गड्ढों से बचने के लिए वाहन चालक गलत साइड में पहुंच जाते हैं और सामने से आ रहे वाहन से टकराकर अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। हादसों पर विराम लगाने के लिए विभाग की तरफ से इन दिनों 80 लाख से सड़क मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। फिलहाल घुटरीटोला चेकपोस्ट से सिद्धबाबा घाट तक सड़क मरम्मत का कार्य हुए चार दिन ही गुजरे थे कि सड़क उखड़नी शुरू हो गई। इसके पीछे जो कारण सामने आ रहा है वह यह कि कार्यस्थल से मटेरियल प्लांट की दूरी अधिकतम 60 किलोमीटर होनी चाहिए। लेकिन सड़क मरम्मत के कार्य में प्रयुक्त किए जा रहे मटेरियल को लगभग 100 किलोमीटर दूर विश्रामपुर से लाया जा रहा है। नतीजतन ज्यादा दूरी होने की वजह से मटेरियल कार्यस्थल पहुंचते तक ठंडा पड़ जा रहा है। इसकी वजह से उसकी पकड़ने की क्षमता कम हो जा रही है। वहीं दूसरा कारण यह कि 6 माह पहले विभाग की तरफ से एनएच में गड्ढों को मुरूम से पटवाया गया था। वहीं अब जबकि सड़क की मरम्मत की जा रही है तो बगैर मुरूम की सफाई किए ही ठेकेदार की तरफ से रिपेयरिंग का कार्य किया जा रहा है। इस प्रकार लाखों रुपए के एनएच रिपेयरिंग के कार्य में ठेकेदार की तरफ से जहां नियमों को दरकिनार कर काम किया जा रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसको लेकर ग्रामीणों का कहना है कि अफसर ठेकेदार के साथ सांठ-गांठ कर रखे हैं। इसी के चलते इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जांच कर आगे की कार्रवाई करेंगे वहीं इस संबंध में एनएच के एसडीओ बीके चतुर्वेदी का कहना है कि गुरुवार को निरीक्षण करने पर सड़क निर्माण में लगने वाले मटेरियल का निर्धारित तापमान 110 डिग्री से कम पाए जाने पर मटेरियल का उपयोग नहीं करने और दूसरा मटेरियल मंगाने के लिए कहा था। इससे यह प्रतीत होता है कि एसडीओ के स्थल निरीक्षण से पहले तक रिपेयरिंग के काम में कम तापमान वाले मटेरियल का उपयोग किया गया है।

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